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हड़ताल! 2 सितम्बर 2015: सरकार की मज़दूर-विरोधी गतिविधियों के खिलाफ. .

August 30, 2015

प्रिय साथी,

मोदी सरकार बड़े पूंजीपतियों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए देश के मज़दूर वर्ग पर एक कटु आघात चला रही है| मज़दूरों के यूनियन बनाने, हड़ताल करने, स्थायी और सुरक्षित नौकरियां पाने और यहाँ तक कि न्यूनतम मज़दूरी पा कर एक सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकारों को दरकिनार करने के लिए मज़दूर विरोधी श्रम कानून सुधारों को लागू किया जा रहा है| इन मज़दूर विरोधी हमलों के खिलाफ सभी केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा अखिल भारतीय मज़दूर हड़ताल की संयुक्त घोषणा की गयी है|

इस संदर्भ में मारुती सुजुकी वर्कर्स यूनियन (मानेसर प्लांट), मारुती सुजुकी कामगार यूनियन (गुड़गांव प्लांट), मारुती सुजुकी पॉवरट्रेन इंडिया एमप्लोयीज़ यूनियन (इंजन प्लांट) और सुजुकी मोटरसाईकिल इंडिया एमप्लोयीज़ यूनियन (बाइक प्लांट) ने ‘मारुती सुजुकी मज़दूर संघ’ के बैनर के अंतर्गत संयुक्त रूप से उत्पादन रोकने और 2 सितम्बर की हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है| प्रबंधन को पहले से ही स्ट्राइक नोटिस दिया जा चूका है| मारुती यूनियनों ने गुड़गांव-मानेसर-धारूहेड़ा-बावल औद्योगिक क्षेत्र में सभी यूनियनों के बीच हड़ताल में शामिल होने की सर्वसहमति बनाने में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है| हम इस पहलकदमी के लिए उन्हें बधाई देते हैं|

यह कदम कई कारणों से महत्वपूर्ण है| 18 जुलाई 2012 के बाद मारुती सुजुकी, खासकर मानेसर प्लांट के मज़दूरों ने प्रबंधन, प्रशासन, पुलिस और न्यायालयों के हाथों कड़े आघात और दमन का सामना किया है| 148 मज़दूर ज़मानत के बिना करीब तीन साल तक जेल की सज़ा काटते रहे| इनमें से 35 साथी अब तक जेल में हैं और उच्च न्यायालय ने हाल ही में इनमें से दो की ज़मानत की अपील ख़ारिज की है| अन्य 64 मज़दूरों के खिलाफ़ गैर-ज़मानती वारंट हैं और इन्हें भगोड़ा घोषित कर रखा है| पुलिस अब तक उनके पीछे पड़ी है| 423 स्थायी मज़दूर, 123 ट्रेनी मज़दूर, और 1800 ठेका मज़दूर बिना किसी जांच के कम्पनी से निकाल दिए गए हैं| मज़दूरों को IMT मानेसर इलाके में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की इजाज़त तक नहीं दी गयी| अंदर काम कर रहे मज़दूरों को बंदूक की नोख पर काम करने को मजबूर किया गया और करीब 2 साल तक कोई यूनियन गतिविधि जारी करने की इजाज़त नहीं दी गयी| किन्तु, बाहर हुए मज़दूरों ने सभी कठिनाइयों का सामना करते हुए भी आज तक अपने संघर्ष को जारी रखा है, और अंदर काम कर रहे मज़दूरों ने इस दमन का जम कर मुकाबला करते हुए यूनियन गतिविधियों को पुनः जारी किया है और बाहर हुए और जेल में बंद संघर्षरत मज़दूरों का समर्थन करते रहे हैं| यह हड़ताल दमन और संघर्ष के ऐसे ही माहौल में होने वाली है|

हम अपने संघर्ष को, या हम पर हो रहे दमन को गुड़गांव-मानेसर-धारूहेड़ा-बावल-नीमराना-भिवाड़ी क्षेत्र के मज़दूर वर्ग के संघर्षों से, श्रीराम पिस्टन, डाईकिन, मिंडा, बैक्सटर, मुंजाल किरिऊ, पौस्को, औटोफिट, हीरो मोटोकोर्प, अस्ति, ताल्ब्रोस, औटोलिव, नपिनो ऑटो, JNS, बजाज मोटर्स, ओरिएंट क्राफ्ट, ऋचा गारमेंट्स इत्यादि में (पिछले तीन सालों में हुए) संघर्षों से, व हमारे देश के संगठित और असंगठित मज़दूरों और उनके प्रतिरोध से अलगाव में नहीं देखते हैं| यह हड़ताल दमन और शोषण के इस तंत्र के खिलाफ संघर्ष करने के हमारे सामूहिक संकल्प की छवि है|
आइये, हम 2 सितम्बर की इस हड़ताल को बड़ी सफलता तक ले जाए और सरकार की मज़दूर-विरोधी गतिविधियों का मुहतोड़ जवाब दें|

मज़दूर एकता और संघर्ष जिंदाबाद!
इंकलाब जिंदाबाद!
लाल सलाम!

प्रोविजनल वर्किंग कमेटी
मारुती सुजुकी वर्कर्स यूनियन

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