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जेल के फाटक टूटेंगे, हमारे साथी छूटेंगे; वर्तामान स्थिति की सूचना

July 24, 2013
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MARUTI SUZUKI WORKERS UNION

Reg. No. 1923

IMT Manesar, Gurgaon

आज, 24 जुलाई, 2013 को कैथल जिला कारागार में बंद हमारे 9 साथियों को आन्दोलन द्वारा महीनों से प्रशासन पर पुरज़ोर दबाव डालने और हमारे समर्थन में हुए अनेकों कार्यक्रमों के बाद आखिरकार ज़मानत पर रिहा किया गया| इनमें मारुती सुजुकी प्रोविजनल कमेटी के सदस्य का. रामनिवास, हिन्दुस्तान मोटर्स श्रमिक कर्मचारी कामगार यूनियन के महासचिव, का. दीपक, मजदूर अखबार श्रमिक शक्ति के संवाददाता का. सोमनाथ, जींद के पंचायत के प्रधान सुरेश कोथ और सामाजसेवक और चिकित्सक डा. अश्विनी भी शामिल थे| परन्तु धारा 307 (हत्या करने की कोशिश) से आयुध अधिनियम जैसे उन पर लगाए सभी झूठे मुकद्दमें आगे भी चलेंगे| इन सुनियोजित राजनीतिक गिरफ्तारियों के बावजूद भी हमने बिना निराश हुए इन पिछले दो महीनों में अपने आन्दोलन को निरंतर जारी रखा है| यही कारण है कि आज सत्ताधारियों को हमारे संघर्ष की सच्चाई के सामने झुकना पड़ा है|

गुडगाँव जेल में बंद हमारे 147 साथियों पर चार्ज लगाने के लिए 19 जुलाई के बाद कोर्ट की अगली तारीख, 27 जुलाई, 2013 नियमित की गयी है| हमारे इन साथियों के खिलाफ लगाए गए मुकद्दमों की सुनवाई अब तक शुरू नहीं की गयी है| 27 जुलाई को प्रबंधन पर लगाए मुकद्दमे में आखरी गवाहों की गवाही होगी|

एक साल से बिना ज़मानत पाए जेल में बंद हमारे 147 साथियों की रिहाई और हमारे अन्य 66 साथियों पर लगाए गैर-जमानती मुकद्म्मों के कुचले जाने की हमारी मुख्य मांगे अब तक बनी हुईं हैं| जब सुजुकी मोटर्स के अध्यक्ष ओसामू सुजुकी भारत आ रहे हैं, हम सभी बर्ख़ास्त मजदूरों की कार्यबहाली की अपनी दूसरी मांग दोहराना चाहते हैं| साथ ही हम मांग करते हैं कि सरकार कम्पनी के हित में काम करना बंद करे और इस पूरे औद्योगिक इलाके में श्रम कानूनों को लागू कराए|

18 जुलाई को MSIL अध्यक्ष आर.सी. भार्गव का कथन कि “मानेसर में हुए हादसे के कारण जापानी निवेशक भारत में बनी औद्योगिक अशांति को लेकर परेशान हैं” और 22 मई को गिरफ्तार मजदूरों की ज़मानत की दरखास्त को ख़ारिज करते हुए उच्च न्याय्लायाय के फैसले की समानता अत्यंत ही आपत्तिजनक है, जहाँ न्यायालय का फैसला कहता है कि “विदेशी निवेशक औद्योगिक अशांति के डर से भारत में निवेश नहीं करना चाहेंगे”| हम सबसे अपील करते हैं की इस बात के प्रति सतर्क रहें कि सरकार की न्याय देने वाली संस्थाएं इस अत्यंत ही शोषणकारी कम्पनी के झूठे प्रचार और पैसे के बल से प्रभावित ना हों|

18 जुलाई 2013 को हम गुडगाँव के लेज़र वैली पार्क में IMT मानेसर तक जुलूस ले जाने के लिए एकत्रित हुए थे, परन्तु हमें बड़ी संख्या में वहां तैनात पुलिस द्वारा वहीँ रोक दिया गाया और जिला उपायुक्त द्वारा IMT मानेसर के पूरे औद्योगिक इलाके में और यहाँ तक की गुडगाँव लघु सचिवालय तक पर भी धारा 144 जारी कर दिया गया| प्रबंधन चाहे इसे एक असमान्य स्थिति की तरह क्यों ना दर्शाए, परन्तु पूरे औद्योगिक इलाके के सभी मजदूरों को अच्छी तरह पता है कि कम्पनी की हितों के पक्ष में हमारे जनतांत्रिक अधिकारों को दबाने के लिए इस प्रकार का प्रशासनिक दमन और दबाव इस औद्योगिक इलाके के लिए सामान्य बात है|

हमारे धरना स्थल पर ही करीब 2000 पुलिसकर्मी तैनात थे और मानेसर में अन्य 10000 पुलिसकर्मी शस्त्र, लाठियों, पानी के तोपों, आसू गैस इत्यादि से लैस खड़े थे जिससे पूरे औद्योगिक इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई थी| कई मजदूरों को व्यक्तिगत रूप से हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हिस्सा बनने से रोका गया| हमारे साथियों को लगातार गुप्तचर विभाग के कर्मियों द्वारा फोन पर धमकियाँ दी गईं| सुजुकी मोटरसाइकिल इंडिया एम्प्लोयीज़ यूनियन के पूरी कमेटी को गुडगाँव के खेरकी धौला गाँव के थाने में SHO द्वारा रोक लिया गया और उनके फोन बंद कर दिए गए ताकि वह हमारे प्रदर्शन में शामिल न हो पाएं|

फिर भी हमने पूरे इलाके के हमारे मजदूर साथियों और विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा हमारे संघर्ष को मिले समर्थन से तथा हमारे मुद्दे को पूरे औद्योगिक क्षेत्र के मजदूरों और ख़ास तौर से ऑटोमोबाइल क्षेत्र के मज़दूरों के संयुक्त मुद्दे के रूप में उठाने की तैयारी से बहुत उत्साह पाया है| अपने प्रधान का. भीम राव के साथ हीरो मोटर कोर्प की यूनियन, अपने निष्कासित प्रधान सूबे सिंह के साथ सुजुकी पवारट्रेन इंडिया एम्प्लाइज यूनियन और रिको ऑटो धारूहेड़ा, नेरोलाक बवाल, IJL रेवाड़ी, NSK की यूनियनों और कई कम्पनी की यूनियन 18 जुलाई को हमारे समर्थन में आईं| इसके अतिरिक्त हमें सीटू, ICTU, AICCTU, जन संघर्ष मंच हरियाणा, हिन्दुस्तान मोटर्स SSK यूनियन, SSC, ब्लूस्टार एम्प्लोयीज़ यूनियन, NTUI, इंकलाबी मजदूर केंद्र, मजदूर क्रांति परिषद्, बिगुल मजदूर दस्ता, AIFTU(न्यू), IFTU और अन्य कई स्थानीय और केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का समर्थन भी मिला| साथ ही PUDR क्रन्तिकारी नौजवान सभा, AISA, NBS, DSU, NSI, प्रतिध्वनि, जनरंग और दिल्ली के अतिरिक्त मुंबई से ले कर बंगाल तक के देश भर के कई अन्य छात्र और जनसंगठन तथा व्यक्ति समर्थन में हमारे साथ खड़े हुए| इसके साथ देश भर में समकालीन प्रदर्शनों का आयोजन किया गया और मुंबई, बैंगलोर, चेन्नई, लुधियाना, चंडीगढ़, कोलकाता, भिल्लाई, हैदराबाद और अन्य कई जगहों से मजदूर संगठनों, ट्रेड यूनियनों और अन्य जन संगठनों ने हमें समर्थन के पैगाम भेजे| हम इन सभी संगठनों और व्यक्तियों को अपना धन्यवाद देते हैं और पूरी दृढ़ता से मजदूरों के इस संघर्ष को आगे बढाने का अपना संकल्प पुनः दोहराते हैं|

25 जुलाई 2013 को गुडगाँव–मानेसर की सभी ट्रेड यूनियनों का गुडगाँव लघु सचिवालय के सामने संयुक्त जुलूस निकलेगा जिसकी प्रमुख मांग होगी कि मारुती सुजुकी मानेसर के सभी गिरफ्तार मजदूरों को फौरन रिहा किया जाए तथा सभी निष्कासित मजदूरों को काम पर वापस लिया जाए| इसके साथ ही इस इलाके की सभी फैक्ट्रियों में चल रहे मजदूरों के शोषण और दमन के खिलाफ एक संयुक्त आवाज़ उठाई जाएगी| हम सभी से अपील करते हैं की इस कार्यक्रम में अपनी पूरी ताकत से शामिल हों|

हम अपना अगला कार्यक्रम मानेसर में आयोजित करने की अपनी मंशा को साफ़ रूप से घोषित कर चुके हैं और गुडगाँव जिला उपायुक्त के साथ सभी सम्बंधित प्राधिकारियों को इसकी लिखित सूचना दे चुके हैं| हम आने वाले दिनों में दमन और शोषण के खिलाफ अपने संघर्ष को नए जोश और उत्साह के साथ आगे ले जाएँगे|

मारुती सुजुकी वर्कर्स यूनियन

प्रोविजनल वर्किंग कमेटी    

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