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मारुति मज़दूरों के न्याय की लड़ाई में साथ दो! कंपनी प्रबंधन-सरकार-प्रशासन व पुलिसतंत्र के दमन के खिलाफ संघर्षरत मज़दूरों का कैथल में चल रहे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का समर्थन करें ! Join in Solidarity with our Struggle for Justice! Support our indefinite Hunger Strike in Kaithal, Haryana against exploitation by the Company management-Government-Administration-Police machinery!

March 23, 2013

मारुति मज़दूरों के न्याय की लड़ाई में साथ दो!

कंपनी प्रबंधन-सरकार-प्रशासन व पुलिसतंत्र के दमन के खिलाफ संघर्षरत मज़दूरों का कैथल में चल रहे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का समर्थन करें !

मज़दूर साथियो व नागरिकों,

   जैसे की आपको पता है पिछले 8 महीनों में हम मारुति मज़दूरों को किसी भी प्रकार का न्याय नही मिला। 18 जुलाई 2012 में मारुति सुजुकी की मानेसर प्लांट में कंपनी प्रबंधन ने मज़दूरों की जायज मांगों को कुचलने के लिए प्लांट के अंदर गुंडे बुलवाकर उन्हें पिटवाया, साजिश के तहत आगजनी की गई जिसमे एक प्रबंधक की मौत हो गई जिसका आरोप मज़दूरों के उपर थोप दिया गया । इसी साजिश के तहत 546 स्थाई और 1800 ठेका मज़दूरों को बिना कोई जांच करवाये नौकरी से निकाल दिया गया और 147 मज़दूरों पर  झूठे मुकदमे ठोककर जेल भिजवाया, जिसमें से किसी कि अभी तक जमानत भी नही हुई है । जेल में भी मज़दूरों के उपर काफ़ी शारीरिक व मानसिक अत्याचार किया जा रहा है । टी. बी., दमा, चर्मरोग जैसे गंभीर बीमारियों के बाद भी उचित इलाज और राहत नही दी जा रही है । इसके अलावा कंपनी की शह पर प्रशासन ने 65 मज़दूरों के खिलाफ गैरजमानती वारंट भी जारी कर रखा है । हरियाणा के गांवों में इन मज़दूरों के घर-घर पुलिस जा कर परिवारों के लोगों के उपर लगातार अत्याचार कर रही है । कभी किसी के  भाई तो कभी किसी का रिश्तेदार को उठाकर थाने में ले जाने का सिलसिला चलाया जा रहा हैं । पिछले 24 जनवरी को प्रोविज़नल वर्किंग कमेटी के सदस्य ईमान खान, जिसका नाम किसी भी एफ. आई. आर में नही था, को पुलिस ने गैरक़ानूनी तरीके से प्रेस-वार्ता से गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया । हम पिछले 8 महीनों में न्याय की उम्मीद में सरकार और प्रशासन के हर दरवाजे को खटखटाया, मंत्रियों से मिलें और अंत में हरियाणा के मुख्यमंत्री के पास भी गए, मगर हमे निराश हो कर वापस लौटना पड़ा । हरियाणा राज्य के उद्योग मंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला जी ने बोल दिया कि उनका काम पूंजीपतियों को उद्योग के लिए जमीन दिलवाना है, मज़दूरों को नौकरी वापस दिलवाना नहीं । और मुख्यमंत्री जी ने तो सीधा धमकी दिया, अगर तुमलोग रोहतक में फिर कोई कार्यक्रम करोगे तो सबको जेल में डाल देंगे । 

   सरकार इस बात का प्रचार कर रही है की कंपनियों के खिलाफ बोलने से राज्य के विकास पर असर पड़ेगा । मगर क्या राज्य के नागरिकों को यह पूछने का हक नहीं है कि सरकार कैसी विकास और किसके विकास कि बात कर रही है? हरियाणा के किसानों कि जमीन को सस्ते दामों में खरीदकर और यहाँ के गरीब किसानों को बेरोजगार करने के बाद भी यहाँ के लड़कों को काम नही मिल रहा है, और जो भी काम मिल रहे हैं उनमें मज़दूरों की भारी मात्रा में शोषण व दमन हो रही है, जबकि हरियाणा की उसी जमीन से सुजुकी जैसे विदेशी पूंजीपति करोडो का मुनाफा पीट रहे हैं । मज़दूरों-किसानों के निर्मम शोषण पर टिकी हरियाणा सरकार पूंजीपतियों द्वारा मज़दूरों का और ज्यादा खून चूसने के लिए फैलाये जा रहे क्षेत्रवाद का भी समर्थन कर रही है । इसी वजह से पूंजीपति हरियाणा के नौजवानों को रोजगार ना देने की ऐलान कर रहे है ।

जरा सोचिये, आज जब 147 बेकसूर नौजवान 8 महीनों से जेल में बंद है, जब कैथल, जींद, यमुनानगर, रेवारी, करनाल आदि जगहों के गांवों में 500 से ज्यादा परिवार भूख और भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और जेल में बंद दूर-दराज के मज़दूरों के परिजन किराये के अभाव में मिलाई तक नही करने नहीं आ पा रहे हैं और न्याय की प्रतीक्षा में हैं, जब कि सुजुकी कंपनी लगातार धमकी दे रही है कि हरियाणा के नौजवानों को नौकरी में नही लिया जायेगा, तब भी हमारे मुख्यमंत्री जी हरियाणा की पंचायतों तक को मारुति के मसले पर बात उठाने से रोक रहे हैं । मुख्यमंत्री जी का पहले कहना था कि एस. आई. टी. कि रिपोर्ट आने के बाद बचे हुए कर्मचारियों को ड्यूटी पर ले लिया जायेगा । लेकिन अब वे बोल रहे हैं कि न्याय की बात कोर्ट में जा कर करो, हम कोई जिम्मेदारी नही लेंगे । क्या मुख्यमंत्री जी को ये पता नहीं है कि कोर्ट में फैसला होने में बीस-बीस साल लग जाता है? इतने दिनों तक केस खींचना कंपनी के लिए तो आसान है मगर मजदूरों के लिए बीस साल तक क़ानूनी लड़ाई लड़ना सम्भब है? हम देख रहे हैं कि किस तरीके से सरकार जनता के पैसों से करोडो रुपये खर्च करके मारुति सुजुकी कंपनी के लिए वकील की व्यवस्था कर रही है । हमें ये भी दिख रहा है कि कंपनी द्वारा उपलब्ध कराये गए मज़दूरों के नामों की लिस्ट के मुताबिक सरकार एस. आई. टी. जांच की रिपोर्ट तैयार कर नौजवान मज़दूरों को दोषी प्रमाणित करने की तैयारी कर रही है ताकि कोई भी मज़दूर अपने जायज अधिकारों की माँग उठाने बारे में सोच भी ना सके । लोकतान्त्रिक होने का दावा करने वाले सरकार से क्या ऐसी उम्मीद की जा सकती है? हरियाणा सरकार की एस. आई. टी. रिपोर्ट कितना मनगढ़ंत और बेबुनियाद है रिपोर्ट को कोई भी व्यक्ति पड़कर जान सकता है । हम माँग करते हैं कि इस झूठी रिपोर्ट को पूर्णतः ख़ारिज कर नए सिरे से निष्पक्ष व उच्चस्तरीय न्यायिक जांच हों ।

   आज यह जान कर भी कि न्याय के सारे दरवाजों को हमारे लिए बंद कर दिये जा रहा हैं, हम न्याय के लिए संघर्ष को जारी रखने का संकल्प लेते हैं । हम बेरोजगारी, भूख और शासन-प्रशासन के दमन-उत्पीड़न के आगे घुटने नहीं टेकेंगे । हम सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि सभी नौजवानों के रोजगार के लिए संघर्ष के रास्ते आगे बढ़ना चाहते हैं और सभी जनता को साथ ले कर अपनी आवाज को बुलंद करना चाहते हैं । इसलिए कैथल में, जहाँ हरियाणा सरकार के उद्योग मंत्री का निवास है, हम 24 मार्च, 2013 से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ रहे हैं । हम मानते हैं कि इस देश का इतिहास सिर्फ अंग्रेजों, उसके दलालों और देशी-विदेशी पूंजीपतियों का इतिहास नहीं है । यह अमर शहीद भगत सिंह, जिनकी शहादत दिवस आज 23 मार्च को है, उनके जैसे हजारों क्रांतिकारियों का भी इतिहास है ।

   मज़दूर भाइयों और नागरिकों, न्याय के लिए, नौजवानों का सम्मान के साथ रोजगार के लिए, सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ और पूंजीपतियों व सरकार के साठ-गाँठ के खिलाफ आवाज बुलंद करने में तन-मन-धन से हमारा सहयोग करे । हमारी उम्मीद हरियाणा में काम कर रहे लाखों श्रमिकों और हरियाणा के आम मेहनतकश जनता के उपर टिकी हुई है। क्योंकि श्रमिकों और मेहनतकश जनता कि बुलंद आवाज ही इस भ्रष्ट, दमनकारी और पूंजीपतियों के गोद में बैठी सरकार को न्याय के रास्ते में लाने को बाध्य कर सकती हैं। हम मारुति के मज़दूर इस अनशन के माध्यम से यह शपथ लेते हैं कि हम सिर्फ अपनी आर्थिक हितों के लिए ही नहीं, सभी मज़दूरों के हितों के लिए और हर किस्म की गैर-बराबरी व अन्याय के खिलाफ लगातार संघर्ष करेंगे। हमारी यह भूख हड़ताल देश के शासक व पूंजीपतियों के अन्याय और उत्पीड़न के खिलाफ मज़दूरों और मेहनतकश जनता की एक नई एकता की शुरुआत करेगी–यही हमारी उम्मीद हैं।

इंकलाब जिंदाबाद!                                                                                       मज़दूर एकता जिंदाबाद!

         23 मार्च 2013

मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन

मारुति सुजुकी वर्कर्स यूनियन की ओर से प्रोविजनल वर्किंग कमेटी द्वारा प्रकाशित

Join in Solidarity with our Struggle for Justice!
Support our indefinite Hunger Strike in Kaithal, Haryana against the Company management-Government-Administration-Police machinery!

Workers and friends,

As much as the company-state nexus would like to think of us as having crushed our quest for justice, we the workers of Maruti Suzuki, Manesar are continuing with our struggle. You are aware because we raised our voice against exploiutation that 2300 of our fellow workers have been terminated from our jobs, 147 workers continue to languish in jail and have not been granted bail or even parole since 18th July 2012, and 65 of us still have non-bailable arrest warrant against us. Haryana state police are continuing to harass us and our family members and relatives or any pro-worker person who stands with us. Our struggle has continued in these 9 months trying to forge solidarities among other workers and toiling people. So, MSWU Provisional Working Committee member Iman Khan was picked up on 24th January 2013 and all the false cases from murder to looting and arson have also been thrust upon him, while his name did not figure in any FIR, Chargesheet or SIT report. Chief Minister of Haryana, Bhupinder Singh Hooda threatened us in our meeting with him on 21st February 2013, that we do another rally like we did on 27th January 2013 in Rohtak or continue with our struggle anywhere, he will arrest all of us and put us behind bars.

This is the reward that our ‘democratic’ government gives us for questioning its model of development, and for whom is this ‘development’ that he is talking about? At the promise of this ‘development’ and ’employment’, the government grabs the lands of poor farmers cheap and hands it over to companies. But the youth do not get any decent employment. The small numbers of us who do get some jobs, are exploited in horrible working conditions and low wage in the factories. When we spoke out against exploitation in work and even after that, we are thrown out of work and hounded and repressed by police and put in jails. When we ask for justice, the police and ministers arrest some more of us and harass us daily. This is how the Haryana government daily works openly for the interests of the capitalists like Suzuki, and against the interests of workers and peasants.

Knowing well that our spirit of struggle for justice is being tried to be extinguished by the corrupt, repressive government-administration which sits on the lap of capitalists, we are taking a pledge to continue and renew our struggle. We will not kneel down before unemployment, hunger and the repression. We will continue this struggle not only for us, but pledge to build and raise a powerful collective voice of workers and toiling people against unemployment, exploitation and repression. Upholding the legacy of Shaheed Bhagat Singh on the 82nd anniversary of his martyrdom day, we are on an indefinite dharna from 24 March 2013 in front of the residence of Haryana Industries Minister, Randip Singh Surjewala and we will go on an indefinite hunger strike from 28th March 2013. We the workers of Maruti Suzuki, with this hunger strike, take a pledge we will struggle continuously, not only for our economic rights but for the rights of all workers, and against inequality and injustice of all kinds in society. That this hunger strike of ours will signal a new unity of workers and toiling people in the country against the exploitation and repression by capitalists and rulers- this is our hope.

Inquilab Zindabad! Mazdoor Ekta Zindabad!

Provisional Working Committee
Maruti Suzuki Workers Union

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